Rajani katare

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करिया मोड़ी भाग ---- 3

                       "करिया मौड़ी" भाग -3

पिछला :--
वो बच्ची के मन पर क्या बीतेगी....सोच सोच के जी भर आता है.... पता नहीं क्या लिखा कर आयी है अपनी किस्मत में.....
अब आगे :--
रात को करमु आया दुकान से... सो मुँह हाथ धोकर सीधे खाना खाता है... दुकान से आते वैसे ही देर हो जाती है.... जमना खाना वाना खाकर आयी... बच्चीं दोनों सो गयीं थीं.... गौरी तो सासु माँ के पास ही सोती थी....... 
अब जमना ने अपनी भाभी की सारी बात बतायी करमु को....देखो तुमको तो पता ही है... माँजी इसे बिल्कुल पसंद नहीं करतीं.... मुझे तो उठते बैठते... गालियाँ सुनाती ही हैं.... चलो कोई बात नहीं.... पर इसका तो सोचो.... इसके ऊपर क्या बीतेगी.....इसकी तो जिंदगी दूभर  (मुश्किल) हो जायेगी......

भाभी के तो कोई संतान नहीं है.... उनकी शादी को बारह बरस हो गये.... खूब इलाज करवा लीं.... डाक्टरों ने भी जबाब दे दिया..... जब वो खुद गोद लेना चाहती हैं.... 
तो अच्छा ही है..... बिटिया की जिंदगी बन जायेगी.... बहुत अच्छे से उसका पालन पोषण हो जायेगा..... 
हाँ यही ठीक रहेगा...... 
तुम सही कह रही हो.... हमारी लाड़ो की जिंदगी बन जायेगी....चलो अब सो जाओ.... रात बहुत हो गयी है.... 
सबेरे जल्दी उठ कर.... अपने काम धाम में लग जाती है..... सोचती है बच्चियाँ सो रहीं हैं.   जब तक बहुत कुछ काम.... निपट जाता है...... 
जमना दिन भर काम में लगी रहती ... साथ साथ बच्चियों को सम्हालती....थक कर चूर हो जाती.... जरा बच्ची को लेकर लेटी नहीं... कि सासु माँ के मुँह से गालियों के फूल झड़ने लगते.... कामचोर... बच्ची को बहाना ले लओ और जाके... खटिया पे पसरर्रा मार के (आराम से फैल पसर कर ) पर गयी आये......
सासु माँ के मुखारविंद से फूल झर रये हते...इतते में ही पीछे से.... जमना की भाभी आ कर खड़ी हो गयीं....
अरे माँ जी पाँये लागूँ....तुम कबे आ गयीं... कल्ल आवे वारी हतीं.... हाँ कल ही आते!! पर क्या हुआ इनके मित्र को भी आना था.... सो हमने सोची कोई बात नहीं.... 
एक दिन पहले ही सही..... 

चल जमना आराम कर लओ होय सो भौजाई को चाय पानी..... सोयी कर ले....जो लौं हम अब्बयीं मंदिर से 
आ रये......संजा होवे वारी आये सो दिया बाती सोयी 
कर लईयो.......

सासु माँ गौरी को लेकर मंदिर चलीं गयीं.....जमना ने झट चाय चढ़ायी.... और भाभी से बात करने लगी.....भाभी ने कहा हम लोग वकील से... कागज तैयार करवा के लाये हैं.... सो तुम दोनों साईन कर दो.... फिर तुम्हारी सासु माँ आतयी होंगी.....ये समझ लो तुम्हारी लड़की....हम लोगों की लाड़ली बन कर रहेगी...तीन महिने की होने वाली है.... सो अब कोई परेशानी भी नहीं होगी....... 

जमना तुम्हारी सासु माँ भी आ गयीं.... उनसे भी बात कर लें.... माँ जी हम लोग इस लिए आये हैं.....हम बच्ची को गोद लेना चाहते हैं.... हओ सो तो ठीकयी है.... मनो पैल मौड़ी को देख सौई लईयो......
हाँ देख भी लिया और खूब प्यार भी कर लिया....... 
बहुत प्यारी बच्ची है........ 

चलो अच्छो है... तुम ओरौं को... बच्ची पसंद तो आयी... इते तो बच्ची परी रहत आये कोई ओको पूछवेयी वारो नैंयां.... तुम औरें अच्छे से देखभाल तो कर हो...कायसे तुमायी कोई औलाद तो है नैंयां.....खैर खाना वाना बना पायी के ने बन पाओ......... 

बन गया माँ जी... बस हम लोग खाना खाकर अभी 
ही निकल जायेंगे....काये जा गाड़ी तुम ओरौं की आये के किराये की लै आये हो......? 
क्रमशः--

  कहानीकार -रजनी कटारे 
       जबलपुर (म. प्र.)

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2 Comments

Zakirhusain Abbas Chougule

20-Nov-2021 07:36 PM

वाह बहुत बढ़िया

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Swati chourasia

20-Nov-2021 06:43 PM

Very beautiful 👌

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